happy diwali essay hindi

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Introduction:एक राष्ट्रीय त्योहार

भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसका सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर्वों और त्योहारों से सजा हुआ है। ये पर्व लोगों के जीवन में जागृति, चेतना और अपार उत्साह का संचार करते हैं। हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों—जैसे दुर्गा पूजा, रक्षा बंधन, जन्माष्टमी और होली—की तरह ही, दीपावली भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है।

दीपावली भारत की पुरातन संस्कृति का प्रतीक है। इसे जन-साधारण के सहयोग और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

दीपावली का अर्थ

दीपक (दिया) को हिंदू धर्म में शुभ और मंगल का प्रतीक माना जाता है। किसी भी मंगल कार्य के लिए दीपक की आवश्यकता होती है।

यह उत्सव कार्तिक मास की अमावस्या की रात को दीपक जलाकर मनाया जाता है, इसलिए इसे दीपावली नाम से जाना जाता है। अमावस्या की रात घोर अंधेरे से भरी होती है, और इस अंधकार को दूर करने के लिए लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं। अमावस्या की रात के साथ इसके संपर्क के कारण ही इसे ‘प्रदीप अमावस्या’ भी कहा जाता है। यही उत्सव दिवाली या दीपावली के रूप में प्रसिद्ध है।

दीपावली का पालन और पौराणिक कथाएँ

हर हिंदू इस पर्व का पालन कई कारणों से करता है, जिनके मूल में ऐतिहासिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पौराणिक महत्व छिपे हैं।

भारतीय पर्व हमेशा किसी न किसी महान व्यक्ति या महत्वपूर्ण घटना से जुड़े होते हैं:

 * राम की वापसी: यह उत्सव मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद, रावण पर विजय प्राप्त करके, अपनी जन्मभूमि अयोध्या लौटने की घटना से जुड़ा हुआ है। अयोध्यावासियों ने दीये जलाकर पूरी नगरी को सजाया था और राम, लक्ष्मण तथा सीता का भव्य स्वागत किया था।

 * लक्ष्मी जी का अवतरण: एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान माता देवी लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। इसलिए दीपावली की रात को धन और समृद्धि की देवी, लक्ष्मी जी की विशेष पूजा की जाती है।

 * नरकासुर का वध: एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने इसी दिन अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से सोलह हज़ार कन्याओं को मुक्ति दिलाई थी। इस विजय और देश में शांति स्थापित होने की खुशी में भी लोग यह उत्सव मनाते हैं।

 * मुक्ति दिवस: एक प्रचलित कहावत के अनुसार, वामन अवतार द्वारा पाताल में बंदी बनाए गए राजा बलि और उनके साथ लक्ष्मी जी को दीपावली के दिन मुक्ति मिली थी। इसीलिए इस दिन को मुक्ति दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

 * काली पूजा: कार्तिक अमावस्या की दीपावली के साथ काली पूजा का प्रचलन भारत में बहु प्राचीन काल से रहा है।

दीपावली का ऐतिहासिक महत्व

दीपावली का जितना पौराणिक महत्व है, उतना ही ऐतिहासिक महत्व भी वर्णित है:

 * जैन धर्म: इसे जैन साहित्य में पक्षरतारा उत्सव के रूप में भी वर्णित किया गया है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, महावीर वर्धमान ने इसी दिन निर्वाण (मुक्ति) प्राप्त किया था।

 * हर्षवर्धन और विक्रमादित्य: सम्राट हर्षवर्धन के ‘नागानंद’ नाटक में भी दीपावली को दीया-प्रतिपाद्य उत्सव के रूप में वर्णित किया गया है। विक्रमादित्य के सिंहासनारोहण और गुप्त वंश से संबंधित घटनाएँ भी दीपावली दिवस से जुड़ी हुई हैं।

 * अन्य संत और गुरु: आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी रामतीर्थ ने भी इसी दिन भौतिक जीवन से मुक्ति प्राप्त कर बैकुंठ धाम की यात्रा की थी।

 * सिख धर्म: सिखों के छठे गुरु, हरगोविंद सिंह, इसी दिन मुगल सम्राट औरंगजेब की कैद से मुक्त हुए थे। इस घटना को बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

दीपावली मनाने का तरीका

दीपावली आलोक (प्रकाश) का पर्व है। कार्तिक अमावस्या की रात दीपकों और बिजली की रोशनी से पूर्णिमा की रात जैसी जगमगा उठती है।

 * सफाई और सजावट: उत्सव के उपलक्ष्य में लोग अपने घर, दुकान और बाजार को अच्छी तरह से साफ-सुथरा करते हैं और सजाते हैं।

 * पूजा: रात में मुख्य रूप से गणेश जी और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

 * परंपराएँ: ओड़िशा (Odisha) जैसे कुछ राज्यों में, घरों में पितृ-पुरुषों (पूर्वजों) के उद्देश्य से रात में दीया दान करने की श्रद्धा-परंपरा का भी पालन किया जाता है।

 * पटाखे: आतिशबाजी (पटाखों) का आकर्षण भी बहुत अधिक होता है, और लोग रात में अपने परिवेश को पटाखों की आवाज और रोशनी से भरकर खुशी मनाते हैं।

दीपावली का मूल्यांकन और निष्कर्ष

दीपावली हिंदुओं का एक अति महत्वपूर्ण त्योहार है।

यह उत्सव हमें अतीत की महत्वपूर्ण घटनाओं को याद करने का अवसर देता है, साथ ही लोगों के बीच सद्भाव और आपसी मेलजोल को बढ़ाता है।

| सकारात्मक पहलू | नकारात्मक पहलू |

|—|—|

| आध्यात्मिक आनंद और खुशियाँ लाता है। | आतिशबाजी (पटाखों) के कारण प्रदूषण और शोर होता है। |

| परिवेश को स्वच्छ करने में सहायक होता है (उत्सव से पहले सफाई)। | कुछ लोग जुए में व्यस्त रहते हैं, जो नुकसानदायक है। |

| पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और भक्ति निवेदन करने की शिक्षा देता है। | पटाखों के कारण दुर्घटनाएँ और चोट लगने का जोखिम होता है। |

| वर्षा ऋतु के बाद उत्पन्न कीटाणुओं को दीयों की गर्मी से नष्ट करने में सहायक माना जाता है। |  |

निष्कर्ष

दीपावली एक आध्यात्मिक आनंद का पर्व है। इसका उद्देश्य केवल खुशियाँ मनाना नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक लक्ष्य यह है कि यह अंधकार से आलोक की ओर ले जाए और हमारे हृदय के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करे। यदि हम दीपावली के पालन के इस उद्देश्य को हृदय से आत्मसात करें, तो इस पर्व को मनाना वास्तव में सार्थक होगा।

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